साजा/सुखरीकला। बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देते हुए साजा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सुखरीकला में विजयादशमी के अवसर पर भव्य दशहरा महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। धार्मिक आस्था, उत्साह और सामाजिक एकजुटता के माहौल में आयोजित इस महोत्सव में रावण दहन देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। आतिशबाजी और ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी जयकारों से पूरा आयोजन स्थल गूंज उठा।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के तेलीघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त जितेंद्र साहू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं, दुर्ग जिला पंचायत उपाध्यक्ष पवन शर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। आयोजन में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों, पार्टी कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
भगवान श्रीराम के आदर्शों से मिलती है सत्य और न्याय की प्रेरणा
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि जितेंद्र साहू ने क्षेत्रवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि दशहरा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय का शाश्वत प्रतीक है। भगवान श्रीराम का जीवन और उनके आदर्श हमें सदैव सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने कामना की कि विजयादशमी का यह पावन पर्व सभी क्षेत्रवासियों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए। साथ ही भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर समाज में सद्भाव और सकारात्मकता बनाए रखने का संदेश दिया।
पवन शर्मा ने दिया सामाजिक एकजुटता का संदेश
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे दुर्ग जिला पंचायत उपाध्यक्ष पवन शर्मा ने भी उपस्थित ग्रामीणों को दशहरा पर्व की बधाई दी। उन्होंने सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे और एकजुटता के महत्व पर जोर दिया। इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों और क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधियों का आयोजन समिति की ओर से पारंपरिक तरीके से स्वागत-सत्कार किया गया।
रावण दहन देखने उमड़ा ग्रामीणों का जनसैलाब
महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रावण दहन रहा। इस पल का साक्षी बनने के लिए सुखरीकला सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और युवा आयोजन स्थल पर पहुंचे। रावण के पुतले का दहन होते ही आतिशबाजी के बीच पूरा परिसर ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से गूंज उठा।
उत्साह और उल्लास के बीच संपन्न हुए इस आयोजन ने ग्रामीण अंचल में दशहरा पर्व की पारंपरिक छटा बिखेर दी। कार्यक्रम के समापन पर लोगों ने एक-दूसरे को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं और पर्व के मूल संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया।