रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के विधानसभा थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां कक्षा आठवीं में पढ़ने वाली 13 वर्षीय छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म किए जाने का आरोप है। घटना के बाद आरोपियों की धमकी और डर के चलते पीड़िता करीब एक महीने तक खामोश रही। इस दौरान उसने किसी को भी अपने साथ हुई घटना की जानकारी नहीं दी। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में अचानक तबीयत बिगड़ने और चक्कर आने की शिकायत के बाद जब परिजनों ने उससे पूछताछ की, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ।
पीड़िता की मां को घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार ने पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पॉक्सो एक्ट सहित संबंधित धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। पुलिस ने इस मामले में शामिल बताए जा रहे 14 और 16 वर्ष के दो नाबालिगों को हिरासत में लिया है। विधिवत कार्रवाई के बाद दोनों को बाल न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें बाल संप्रेषण गृह भेज दिया गया।
सहेली से मिलने गई थी छात्रा, घर में अकेला पाकर बनाया निशाना
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना 25 सितंबर की बताई जा रही है। उस दिन 13 वर्षीय छात्रा अपनी एक सहेली से मिलने उसके घर गई थी। बताया जा रहा है कि वहां उसकी सहेली मौजूद नहीं थी, लेकिन सहेली का भाई और एक अन्य नाबालिग घर पर थे।
आरोप है कि दोनों नाबालिगों ने छात्रा को अकेला पाकर उसके साथ जबरदस्ती की। घटना के बाद उसे किसी को भी इस बारे में बताने पर जान से मारने की धमकी दी गई। इसी डर के कारण बालिका घर लौटने के बाद भी किसी से कुछ नहीं कह सकी।
धमकी के डर से दबा रहा दर्द, एक महीने बाद हुआ खुलासा
घटना के बाद से पीड़िता मानसिक डर और तनाव में रही। वह सामान्य रूप से घर लौट आई, लेकिन अपने साथ हुई घटना के बारे में परिवार को कुछ नहीं बताया। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और उसे चक्कर आने लगे।
बालिका की स्थिति देखकर परिजनों ने उससे लगातार पूछताछ की। आखिरकार उसने अपनी मां के सामने पूरी घटना बयां कर दी। बेटी की आपबीती सुनकर परिवार के लोग स्तब्ध रह गए। इसके बाद परिजन उसे लेकर विधानसभा थाने पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
दोनों आरोपी नाबालिग, बाल संप्रेषण गृह भेजे गए
बताया जा रहा है कि मामले में हिरासत में लिए गए दोनों आरोपियों की उम्र 14 और 16 वर्ष है। इनमें से एक ने पढ़ाई छोड़ दी है, जबकि दूसरा कक्षा नौवीं में अध्ययनरत बताया जा रहा है। दोनों परिवार एक ही आवासीय कॉलोनी में रहते हैं और उनके बीच पहले से परिचय था।
पीड़िता और आरोपियों के माता-पिता मजदूरी करते हैं तथा सुबह काम पर चले जाते हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर पॉक्सो एक्ट और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दोनों नाबालिगों को बाल न्यायालय में पेश किए जाने के बाद बाल संप्रेषण गृह भेज दिया गया है। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। यह घटना एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा, उनके प्रति जागरूकता और किसी भी तरह की धमकी या शोषण की स्थिति में समय रहते परिवार तथा पुलिस को जानकारी देने की जरूरत को रेखांकित करती है।