अंबिकापुर। श्री राजपूत करणी सेना छत्तीसगढ़ (एकीकृत राजपूत महिला संगठन) के तत्वावधान में अंबिकापुर में दशहरा मिलन समारोह, भव्य शोभायात्रा, पारंपरिक शस्त्र पूजन एवं गरबा महोत्सव का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में शामिल मातृशक्ति ने पारंपरिक राजपूती वेशभूषा में अपनी सांस्कृतिक विरासत, एकजुटता और गौरवशाली परंपराओं का परिचय दिया। पूरे आयोजन में उत्साह, पारंपरिक रीति-रिवाजों और नारी शक्ति का विशेष संगम देखने को मिला।
मां दुर्गा के जयकारों के साथ निकली भव्य शोभायात्रा
कार्यक्रम का शुभारंभ मां दुर्गा के जयकारों के बीच निकाली गई भव्य शोभायात्रा से हुआ। पारंपरिक राजपूती परिधान में सजी वीरांगनाएं हाथों में तलवार लेकर शोभायात्रा में शामिल हुईं। शोभायात्रा ने शहर में आकर्षण का केंद्र बनते हुए राजपूताना संस्कृति और परंपराओं की झलक प्रस्तुत की। विभिन्न स्थानों पर शोभायात्रा का स्वागत किया गया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पारंपरिक शस्त्र पूजन संपन्न हुआ।
प्रदेश अध्यक्ष मीनू डब्बू सिंह चौहान का हुआ भव्य स्वागत
समारोह में श्री राजपूत करणी सेना महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती मीनू डब्बू सिंह चौहान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। अंबिकापुर की मातृशक्ति ने तलवार, स्मृति चिह्न और पुष्पमाला भेंट कर उनका भव्य स्वागत एवं नागरिक अभिनंदन किया। इस दौरान बालिकाओं और महिलाओं ने स्वागत गीत की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिसने समारोह को और भी आकर्षक बना दिया।
गरबा की धुन पर झूमीं महिलाएं, उत्कृष्ट कार्यों के लिए हुआ सम्मान
समारोह में पारंपरिक गरबा महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं और बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से पारंपरिक लोक संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया गया। संगठन के लिए उत्कृष्ट योगदान देने वाली सदस्यों को तलवार भेंट कर सम्मानित किया गया।
जिला अध्यक्ष मोनिका सिंह और टीम की सराहना
प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती मीनू डब्बू सिंह चौहान ने आयोजन की सफलता के लिए जिला अध्यक्ष मोनिका सिंह एवं अंबिकापुर जिला कार्यकारिणी की पूरी टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति का संगठित और गौरवमयी स्वरूप समाज के लिए प्रेरणादायी है। अंबिकापुर की मातृशक्ति द्वारा दिया गया आत्मीय स्वागत और सम्मान सदैव स्मरणीय रहेगा।
कार्यक्रम का समापन ‘जय भवानी, जय राजपूताना’ के गगनभेदी नारों के साथ हुआ। दशहरा मिलन के इस आयोजन ने राजपूताना परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और महिला एकजुटता को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।