रायपुर, 23 अक्टूबर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने बस्तर प्रवास के दौरान जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने मां दंतेश्वरी के समक्ष शीश नवाकर देशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की। राष्ट्रपति के मंदिर पहुंचने पर पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया गया।
मां दंतेश्वरी बस्तर अंचल की आराध्य देवी हैं। क्षेत्र के लोगों की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं में उनका विशेष स्थान है। राष्ट्रपति का मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन करना बस्तर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के लिहाज से महत्वपूर्ण अवसर रहा।
बस्तर की आस्था और परंपरा का प्रतीक हैं मां दंतेश्वरी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मां दंतेश्वरी के प्रति बस्तरवासियों की अटूट श्रद्धा है। मां दंतेश्वरी यहां की आस्था, लोकजीवन और सांस्कृतिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का मंदिर में दर्शन-पूजन करना बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्राचीन परंपराओं और विशिष्ट जीवन मूल्यों के लिए देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। यहां प्रकृति, आस्था और समाज के बीच गहरा संबंध दिखाई देता है। राष्ट्रपति के प्रवास से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और सम्मान मिलने की उम्मीद है।
सदियों पुरानी परंपराओं से जुड़ी है श्रद्धा
मां दंतेश्वरी की उपासना बस्तर की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पीढ़ियों से चली आ रही यह आस्था क्षेत्र के सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक पहचान में गहराई से रची-बसी है। मंदिर में होने वाले धार्मिक अनुष्ठान और परंपराएं बस्तर की विरासत को जीवंत बनाए रखते हैं।
राष्ट्रपति के दर्शन-पूजन के इस अवसर ने एक बार फिर बस्तर की धार्मिक आस्था, जनजातीय संस्कृति और समृद्ध परंपराओं को चर्चा में ला दिया है।