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जहरीली हवा की चपेट में राजधानी

Samadhaan Admin • 03 नवंबर 2026
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जहरीली हवा की चपेट में राजधानी

GRAP-2 के तहत सफाई, पानी के छिड़काव और जांच के निर्देश

नई दिल्ली। दीपावली के त्योहार से पहले ही देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण ने खतरनाक रूप ले लिया है। लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि राजधानी की हवा में सांस लेना भी सेहत के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। मंगलवार सुबह 8 बजे दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 451 दर्ज किया गया, जो बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है, जबकि अन्य क्षेत्रों में भी प्रदूषण का स्तर बेहद खराब बना हुआ है।

रोहिणी, पंजाबी बाग और बवाना में सबसे खराब स्थिति

दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का स्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। रोहिणी में AQI 429 दर्ज किया गया, जबकि पंजाबी बाग में 424 और बवाना में 408 रहा। इन इलाकों में हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई।

वहीं, पटपड़गंज में AQI 379, आरके पुरम में 374 और आईटीओ में 373 रिकॉर्ड किया गया। ओखला फेज-2 और चांदनी चौक में यह स्तर 352 रहा। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में AQI 355 और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में 328 दर्ज किया गया। इन सभी क्षेत्रों में हवा बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है।

कुछ इलाकों में प्रदूषण का स्तर तुलनात्मक रूप से कम जरूर रहा, लेकिन वहां भी स्थिति राहत देने वाली नहीं है। IGI एयरपोर्ट टर्मिनल-3 पर AQI 287, आनंद विहार में 279, उत्तम नगर में 274 और आईएमडी लोधी रोड पर 226 दर्ज किया गया। ये सभी आंकड़े खराब वायु गुणवत्ता की श्रेणी में आते हैं।

GRAP-2 लागू, गाजीपुर बॉर्डर पर वाहनों की जांच शुरू

प्रदूषण के बढ़ते खतरे को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने सोमवार को दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण लागू कर दिया। इसके साथ ही GRAP के पहले चरण के प्रतिबंध भी प्रभावी रहेंगे।

दिल्ली पुलिस ने गाजीपुर बॉर्डर पर वाहनों की जांच शुरू कर दी है। GRAP-2 के तहत संबंधित विभागों को प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों और गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के नगर निगमों, ट्रैफिक पुलिस तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को भी आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा गया है।

सड़कों पर पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर बढ़ेगी निगरानी

प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भारी ट्रैफिक वाले मार्गों और जाम प्रभावित क्षेत्रों में मशीनों से नियमित सफाई तथा पानी का छिड़काव किया जाएगा। धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी में विशेष पदार्थ भी मिलाए जाएंगे। यह कार्य यातायात के व्यस्त समय से पहले करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा प्रदूषण के हॉटस्पॉट और निर्माण स्थलों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। निर्माण एवं तोड़फोड़ के दौरान उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए भी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

बच्चों और बुजुर्गों के लिए बढ़ा खतरा

दीपावली से पहले राजधानी की हवा का इस कदर जहरीला होना स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है। प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा सहित सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें और बाहर जाते समय उचित सुरक्षा उपाय अपनाएं। फिलहाल दिल्लीवासियों को त्योहार से पहले साफ हवा का इंतजार है, लेकिन मौजूदा हालात ने प्रशासन के सामने प्रदूषण नियंत्रण की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

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