
जाँजगीर-चाँपा(सुघर गांव)।
जिले के सारागाँव, पचोरी, चोरिया मोड़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर राखड़ डंप किए जाने से स्थानीय नागरिकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, इस राखड़ का उपयोग जमीन को समतल करने के लिए किया जा रहा है, जिसके बाद यहां अवैध प्लॉटिंग की जाने की आशंका जताई जा रही है। लेकिन इस बार राखड़ डंप किए जाने से न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि आसपास के ग्रामवासियों का जीवन भी कठिनाइयों से भर गया है। राखड़ का धुआंधार कहर हवा में घुल कर घरों तक पहुंच रहा है और जहर का कार्य कर रहा है। राखड़ के महीन कण हवा में उड़कर आस पास के घरों में पहुंच रहे हैं, जिससे आसपास के ग्रामीण वासियों को सांस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस जहरीले धूल के कारण बच्चों, बुजुर्गों और दमा के मरीजों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। कई लोगों ने आंखों में जलन, गले में खराश और सांस की तकलीफ की शिकायत की है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि राखड़ की परतें उनके घरों, कपड़ों, बर्तनों और पानी तक में जम रही हैं, जिससे साफ-सफाई बनाए रखना भी मुश्किल हो गया है।
पंचायतो के बिना अनुमति हो रहा है राखड़ डंप, प्रशासन मौन
सूत्रों के अनुसार, इस राखड़ डंपिंग के लिए न तो प्रशासन से कोई अनुमति ली गई है और न ही ग्राम पंचायत से अनुमति अब देखना होगा कि खनिज विभाग की ओर से इसकी जांच की जायेगी की नहीं ? ग्रामीणवासियों का कहना है कि जब भी बड़े ऐसे मुद्दे को उठाया जाता है, तो जिम्मेदार अधिकारी मामले को नजरअंदाज कर देते हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि इस अवैध गतिविधि पर तुरंत रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
अवैध राखड़ की परिवहन एवं डंपिंग से, पर्यावरण को गंभीर खतरा
सारागाँव, पचोरी, चोरिया मोड़ क्षेत्र में पहले भी बिना अनुमति राखड़ डंपिंग के मामले सामने आए हैं। जानकारो का कहना है कि जमीन को समतल करने के बाद इस इलाके में अवैध रूप से प्लॉटिंग करने की आशंका भी जताई जा रही हैं, जिससे सरकारी राजस्व को भी नुकसान होगा। लेकिन इस प्रक्रिया में पर्यावरण का भी भारी नुकसान हो रहा है। राखड़ के अंधाधुंध इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो रही है, जिससे भविष्य में इस भूमि पर किसी भी प्रकार की खेती या वृक्षारोपण असंभव हो सकता है।
ग्रामीण वासियों की मांग-प्रशासन करे त्वरित कार्यवाही
इस गंभीर समस्या से परेशान ग्रामीण वासियों ने प्रशासन से तत्काल कार्यवाही की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि अगर जल्द ही इस पर रोक नहीं लगाई गई तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे को लेकर विरोध दर्ज कराने की तैयारी कर ली है।
क्या करेगा प्रशासन ?
अब देखने वाली बात यह होगा कि प्रशासन इस अवैध राखड़ डंपिंग और संभावित अवैध प्लॉटिंग पर क्या कार्यवाही करता है। क्या संबंधित विभाग इस गंभीर मुद्दे को संज्ञान में लेकर दोषियों पर कार्यवाही करेगा, या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा ? ग्रामीण वासियों को अब प्रशासन से ठोस कदम उठाने की उम्मीद है ताकि उनके स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।







